राजनीति
हिमाचल सीएम ने मुख्य सचिवों के सम्मेलन की तैयारियों का लिया जायजा
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने 16-17 जून को प्रस्तावित अखिल भारतीय मुख्य सचिवों के सम्मेलन की तैयारियों का जायजा लिया। यह सम्मेलन धर्मशाला के एचपीसीए स्टेडियम में आयोजित होगा। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर और ‘परिधि गृह’ का भी दौरा किया।
इससे पहले ठाकुर ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि यह राज्य के लिए गर्व की बात है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री मोदी एक सप्ताह के भीतर हिमाचल प्रदेश का दौरा कर रहे हैं।
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री के साथ सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप, भाजपा के प्रदेश संगठन महासचिव पवन राणा और भाजपा के प्रदेश महासचिव त्रिलोक कपूर भी मौजूद थे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
दक्षिण कोरिया: किम जोंग उन ने ‘वैचारिक तौर-तरीकों में बदलाव’ का किया आह्वान

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने पार्टी पदाधिकारियों से कहा है कि वे “समय की मांग” के मुताबिक पार्टी के प्रचार और वैचारिक अभियान को नए सिरे से तैयार करें।
योनहाप ने कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के हवाले से बताया कि सोमवार को सूचना क्षेत्र के अधिकारियों के लिए पार्टी की तीसरी कार्यशाला के समापन भाषण में किम ने “वैचारिक कामकाज की सामग्री, स्वरूप, तरीकों और साधनों” को आधुनिक बनाने के लिए “सिद्धांतों से जुड़े मुद्दों” और कार्यों को रेखांकित किया।
उन्होंने “सूचना और प्रेरणा के काम में नवाचार और संस्कृति के निर्माण” का आह्वान किया और जोर दिया कि ये “समय, क्रांति और लोगों की उम्मीदों” के अनुरूप हों।
खासकर, किम ने “प्रतिक्रियावादी वैचारिक संस्कृति के प्रसार को पूरी तरह से रोकने” के लिए “आधुनिक सूचना और तकनीकी साधनों” के इस्तेमाल का आह्वान किया; इस कदम को बाहरी विचारों और प्रभावों के प्रवाह को अधिक प्रभावी ढंग से रोकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
केसीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, चार दिन तक चली यह कार्यशाला सोमवार को संपन्न हुई। यह कार्यशाला किम के “क्रांतिकारी विचारों” और “पार्टी की क्रांतिकारी विरासतों और नेतृत्व की उपलब्धियों” पर आधारित वैचारिक शिक्षा पर केंद्रित थी।
प्रतिभागियों से आग्रह किया गया कि वे “वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के नौवें कांग्रेस के फैसलों को लागू करने के लिए जनता को प्रेरित करने हेतु सूचना और प्रचार अभियान को तेज करें” और हर क्षेत्र व इकाई के हिसाब से वैचारिक कामकाज को तैयार करें।
कार्यशाला में “वैचारिक कामकाज के नए स्वरूपों और तरीकों,” “यथार्थवादी और आकर्षक ढंग से सूचना का काम करने” के तरीकों को प्रभावी बनाने की नीति के अनुसार विजुअल एड्स (दृश्य साधनों) के इस्तेमाल” पर भी चर्चा की गई।
इस साल का सत्र 2022 में शुरू हुई ऐसी कार्यशालाओं की श्रृंखला में तीसरी कार्यशाला थी। किम ने उद्घाटन और समापन, दोनों समारोहों में हिस्सा लिया और हर बार भाषण दिया।
राजनीति
‘राहुल के शो हाउसफुल, प्रधानमंत्री के टिकट काउंटर पर सन्नाटा’ : शिवसेना (यूबीटी)

शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ में इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा गया है। संपादकीय में कहा गया है कि इंदौर में राहुल गांधी के साथ मिमिक्री में हिस्सा लेने वाले पुलकित मणि का दूसरे दिन का कॉमेडियन शो रद्द करने के लिए मजबूर किया गया।
‘सामना’ में लिखा गया है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में पीछे जा रहा है और प्रधानमंत्री सिर्फ नेताओं को जोर से गले लगाने के लिए वैश्विक आयोजन कर रहे हैं, इसका एक व्यंग्य चित्र सार्वजनिक मंच पर राहुल गांधी ने बनाया। इस पर देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह व्यंग्य चित्र देश का अपमान है। इस पर संपादकीय में सवाल उठाया गया है- फडणवीस यह कैसे कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री ही देश हैं?
संपादकीय में लिखा गया है कि इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में गांधी की मौजूदगी में प्रधानमंत्री की नकल की गई, इससे भाजपा वालों को तकलीफ हुई। देवेंद्र फडणवीस का मार्गदर्शन है कि ‘राहुल गांधी को स्टैंड-अप कॉमेडियन बनना चाहिए।’ लेकिन सच तो यह है कि 90 प्रतिशत भाजपा वाले राहुल गांधी से खुश हैं।
‘सामना’ में लिखा गया कि अगर राहुल गांधी ने स्टैंड-अप कॉमेडियन का पेशा अपना लिया तो प्रधानमंत्री का क्या होगा, उनके पास क्या काम बचेगा, वे और उनका अनुसरण करने वाले बेरोजगार हो जाएंगे।
संपादकीय में प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए लिखा गया है कि प्रधानमंत्री वैश्विक नेताओं से मिलने जाते हैं तो उनके गले पड़कर इतनी कसकर गले लगाते हैं कि उस विदेशी नेता का दम घुटने लगता है। हाथ मिलाते हैं तो इतनी जोर से हाथ दबाते हैं कि मेहमान के चेहरे पर दर्द साफ दिखता है।
संपादकीय में लिखा गया है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति पेशे से कॉमेडियन हैं और पीएम मोदी उन्हें मित्र मानते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने तो कॉमेडी की पराकाष्ठा ही पार कर ली है। उनकी उछल-कूद और व्यवहार देखकर हंसी से लोटपोट हो जाएं ऐसा है। राष्ट्रपति ट्रंप के हास्य के प्रधानमंत्री प्रशंसक हैं।
संपादकीय के अनुसार, संसद में प्रधानमंत्री के संबोधन की शैली कई बार गंभीर संसदीय परम्पराओं के अनुरूप प्रतीत नहीं होती। उन्होंने इसकी तुलना मिमिक्री या कॉमेडी से की, साथ ही यह कहकर भी आलोचना की कि ऐसे संबोधन में तार्किक चर्चा के बजाय नाटकीयता, विशेष शारीरिक हाव-भाव और हास-परिहास का प्रभाव अधिक दिखाई देता है। सामना में नेहरू और गांधी का जिक्र करते हुए कहा गया कि ऐसे व्यक्तित्वों का मजाक उड़ाया जाता है। संपादकीय में प्रधानमंत्री पर सार्वजनिक संदेशों और उनके व्यक्तिगत निर्णयों में विरोधाभास का भी आरोप लगाया गया। वक्तव्य में कहा गया है कि विभिन्न कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री के भावुक होने, या अत्यधिक अनौपचारिक आचरण दिखाने जैसे तौर-तरीकों को केवल दिखावा मात्र माना जा सकता है।
‘सामना’ में तंज कसते हुए लिखा गया है कि प्रधानमंत्री के ‘कॉमेडी शो’ के टिकट काउंटर की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर है, लेकिन फिलहाल इस टिकट काउंटर पर सन्नाटा है और राहुल गांधी के सभी शो हाउसफुल चल रहे हैं।
संपादकीय में यह भी कहा गया है कि जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब उनका भी मजाक उड़ाया था। ‘मौनीबाबा’, ‘नीतिगत पक्षाघात’ जैसे विशेषण लगाकर उनका अपमान किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
प्योंगयांग से बातचीत की अपील, दक्षिण कोरिया-यूएस-जापान ने परमाणु निरस्त्रीकरण पर जताई प्रतिबद्धता

दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के शीर्ष राजनयिकों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही प्योंगयांग से बातचीत फिर शुरू करने की अपील भी की है। तीनों देशों ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए बातचीत का रास्ता खुला हुआ है।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने सोमवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह से इतर त्रिपक्षीय बैठक की।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में तीनों देशों ने “उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से होने वाली आय को रोकने तथा संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्तावों को लागू करने की प्रतिबद्धता” भी दोहराई।
बयान में कहा गया, “तीनों देशों ने डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) यानी उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। बातचीत का रास्ता खुला है और उत्तर कोरिया को बातचीत की मेज पर लौटना चाहिए।”
योनहाप के मुताबिक यह अपील ऐसे समय की गई है जब उत्तर कोरिया लगातार अपने हथियार कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहा है। उत्तर कोरिया ने मंगलवार को बताया कि उसके नेता किम जोंग-उन की मौजूदगी में रविवार को एक नए हथियार तंत्र का परीक्षण किया गया। उत्तर कोरिया ने इस हथियार के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन इसे अपनी हथियार तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उत्तर कोरिया के साथ बातचीत फिर शुरू करने की अपील को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस इच्छा के संदर्भ में भी देखा जा रहा है कि वह इस साल किम जोंग-उन के साथ फिर बैठक कर अपनी व्यक्तिगत कूटनीति को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
हालांकि अमेरिका ने प्योंगयांग के साथ बातचीत की संभावना खुली रखने के साथ ही दक्षिण कोरिया और जापान की रक्षा के प्रति अपनी ‘आयरनक्लैड’ प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
बयान के अनुसार “अमेरिका ने कहा कि दक्षिण कोरिया और जापान की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्धता अमेरिकी सैन्य क्षमता और उसकी परमाणु क्षमताओं से स्वीकृत है।”
तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने उत्तर कोरिया द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के उल्लंघन और उनसे बचने के प्रयासों की निगरानी करने वाले बहुपक्षीय प्रतिबंध निगरानी दल (एमएसएमटी) के काम का भी स्वागत किया।
उन्होंने उत्तर कोरिया के आईटी कर्मचारियों से जुड़े साइबर खतरों को लेकर विभिन्न देशों द्वारा जारी चेतावनियों का भी स्वागत किया। “तीनों देशों ने जून में हुई त्रिपक्षीय कार्य समूह की बैठक के जरिए उत्तर कोरिया से जुड़े साइबर खतरों से निपटने के प्रयासों में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया।”
बैठक में ताइवान स्ट्रेट में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। तीनों देशों ने ताइवान से जुड़े मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया और यथास्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध किया।
उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और दुनिया के अन्य हिस्सों में नौवहन तथा हवाई उड़ान की स्वतंत्रता, निर्बाध वैध व्यापार और समुद्र के अन्य वैध उपयोगों को बनाए रखने के समर्थन की बात कही। इन सभी गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के अनुरूप रखने पर जोर दिया गया।
ताइवान का मुद्दा ऐसे समय में चर्चा में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को व्हाइट हाउस में शिखर बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच भू-राजनीतिक मुद्दों सहित कई विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय के अनुसार, चो, रुबियो और मोतेगी ने पूर्वोत्तर एशिया तथा पश्चिम एशिया की स्थिति समेत प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। तीनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच आपसी संपर्क और समन्वय को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
बैठक में आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। तीनों देशों ने आर्थिक दबाव तथा गैर-बाजार नीतियों और ऐसी गतिविधियों का विरोध करने की बात कही, जिनसे बाजार में असंतुलन पैदा होता है और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है।
तीनों देशों ने महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित रखने तथा स्वतंत्र और पारदर्शी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई। इसके तहत त्रिपक्षीय आपूर्ति श्रृंखला प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने और आर्थिक सुरक्षा पर नई त्रिपक्षीय बातचीत शुरू करने का स्वागत किया गया।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी तीनों देशों ने क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। इसमें तेल भंडार बढ़ाना तथा तेल उत्पादक और उपभोक्ता देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
विदेश मंत्रियों ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की तैनाती में तेजी लाने के लिए 7 जुलाई को हुए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन को लागू करने की योजना पर भी प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि यह काम परमाणु सुरक्षा, सुरक्षा मानकों और परमाणु अप्रसार के उच्चतम मानकों के अनुरूप किया जाना चाहिए।
इसके अलावा तीनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, डिजिटल बुनियादी ढांचे और जैव प्रौद्योगिकी जैसी महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों के विकास और सुरक्षा के लिए सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई।
दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के शीर्ष राजनयिकों की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर तीनों देशों के बीच समन्वय लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। इससे पहले तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की त्रिपक्षीय बैठक 7 जुलाई को तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान और 22 जुलाई को फिलीपींस में आसियान से जुड़े क्षेत्रीय मंच के दौरान हुई थी।
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