राष्ट्रीय समाचार
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष एकजुट, बैठक के बाद चुनाव आयोग पर तीखा हमला
नई दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन के बीच इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में इंडिया ब्लॉक में शामिल लगभग सभी पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक के बाद नेताओं ने मीडिया को भी संबोधित किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रशांत भूषण, सपा सांसद समेत तमाम नेताओं ने एकजुटता दिखाते हुए ज्ञानेश कुमार पर हमला बोला।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी नेताओं ने जनता के मुद्दों को लेकर काम किया और इसमें सफलता भी मिली है। इससे पहले दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में लोग एकत्रित नहीं हुए थे। यह पहली बार है कि सभी लोग यहां पहुंचे हैं। सरकार का वोट चोरी का जो प्लान है, उसके खिलाफ सभी तैयार हो गए हैं।
इसके बाद आरजेडी के तेजस्वी यादव ने कहा कि सभी जानते हैं कि ज्ञानेश कुमार ने जिस तरह लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास किया है। हम सभी लोकतंत्र को बचाने के लिए तैयार हैं और किसी भी कुर्बानी के लिए भी तैयार हैं। यह देश गांधी, लोहिया, भगत सिंह और कर्पूरी ठाकुर का है। इस देश की संवैधानिक संस्थाओं को हाईजैक करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स को हाईजैक करने की कोशिश हो रही थी, लेकिन चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार उससे भी आगे निकल गए। जिस तरह वे एक कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं, उन्हें सजा मिलनी जरूरी है। उनका डर ही है कि उन्होंने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। इसी से उनका डर दिखाई देता है। हम सभी लड़ेंगे और जीतेंगे। जिन लोगों ने षड्यंत्र किया है, फर्जी चुनाव कराया है, जनता उनसे जवाब मांग रही है। इन लोगों पर कार्रवाई जरूर होगी।
डी. राजा ने कहा कि सभी वरिष्ठ नेताओं ने देश के हालात पर चर्चा की है और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियान की समीक्षा की है। दिल्ली देश की राजधानी है और यह हमारा शहर है, लेकिन यहां हर तरफ बैरिकेड दिखाई देते हैं, लोगों को आने-जाने से रोका जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन होंगे, आप उन्हें कुचल नहीं सकते। सरकार ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है, इसे वापस लिया जाना चाहिए। पहले राजपथ और संसद मार्ग को बंद किया गया और अब जंतर-मंतर को बंद किया जा रहा है। हम इसकी निंदा करते हैं। हम इसके लिए भी लड़ाई लड़ेंगे। हम कुछ नया नहीं मांग रहे हैं, लेकिन संविधान में हमें प्रदर्शन करने का जो अधिकार मिला है, उसे हम छीनने नहीं देंगे।
सुप्रिया सुले ने कहा कि हम सभी इंडिया गठबंधन के साथ हैं। संविधान खतरे में है और हम इसके लिए लड़ते रहेंगे। हम आंदोलन जारी रखेंगे। संविधान में जो अधिकार हमें मिले हैं, सरकार उन्हें कुचलने की बड़ी भूल कर रही है। इसके खिलाफ हम पूरी ताकत के साथ खड़े हैं। हम पूरी मजबूती के साथ गठबंधन के साथ हैं।
सपा के हरेंद्र मलिक ने कहा कि समाजवादी पार्टी इंडिया गठबंधन के साथ खड़ी है। हम न्याय की इस लड़ाई में विपक्ष की एकता को बनाए रखते हुए लोकतंत्र के हत्यारों और संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा कर चुनाव को प्रभावित करने तथा वोट चोरी करने वालों के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं। हम न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।
प्रशांत भूषण ने कहा कि 2 अक्टूबर से दिल्ली में चुनाव आयोग, ज्ञानेश कुमार, वोट चोरी और लोकतंत्र की हत्या के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ है। इस आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार ने मेट्रो बंद कर दी, इंटरनेट बंद कर दिया। ट्रेनें रोक दीं और दिल्ली में सब कुछ बंद कर दिया। प्रदर्शन करना हमारा अधिकार है, इसे कोई नहीं रोक सकता। सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि सड़कों और पार्कों को प्रदर्शन के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि हम सभी साथ आ गए हैं और एकजुट होकर लड़ेंगे। किसान संगठनों समेत तमाम संगठन साथ आएंगे। हम सभी मिलकर इस लड़ाई को लड़ेंगे और जीतेंगे भी।
सीपीआई (एम) के एम.ए. बेबी ने कहा कि जिसे निष्पक्ष होकर काम करना था, वह सत्ताधारी पार्टी के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसलिए हम उनके खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। ये लोग वोट चोरी करते हैं, प्रदर्शन की जगह छीनते हैं और लोकतंत्र की चोरी करते हैं। इसके खिलाफ हम संघर्ष कर रहे हैं और करते रहेंगे।
संजय राउत ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ऐसे माफिया हैं, जिन्होंने पूरे सिस्टम का अपराधीकरण किया है। ऐसे लोगों से कैसे निपटना है, हमें पता है। पिछले दस-बारह वर्षों से लोगों को डरा-धमकाकर रखा गया है, लेकिन अब डराने वालों की बारी डरने की है। इतनी बड़ी संख्या में फोर्स तैनात करके लोग अंदर बैठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में जो संघर्ष चल रहा है, वह जारी रहेगा। हम सभी एक साथ हैं और एक साथ ही रहेंगे।
राष्ट्रीय समाचार
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका, गुरुवार को सुनवाई की उम्मीद

दिल्ली में जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। वकील लक्ष्य सैनी और तुषार गुप्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर लंबे समय से राजधानी में विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होने की उम्मीद है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि लोगों को विरोध-प्रदर्शन के लिए शहर से दूर स्थित वैकल्पिक जगहों पर भेजा जाता है, तो आम नागरिकों के लिए अपनी आवाज उठाना और विरोध दर्ज कराना मुश्किल हो सकता है। इससे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाने का खतरा है।
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि जंतर-मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया गया है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थलों की पहचान भी की है।
न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कहा था कि वैकल्पिक स्थलों की पहचान सुप्रीम कोर्ट के पिछले सप्ताह के आदेश के अनुरूप की गई है। उन्होंने दलील दी कि शीर्ष अदालत ने उपयुक्त स्थलों की पहचान कर उन्हें निर्धारित करने को कहा था और अधिकारियों ने उसी के अनुसार कार्रवाई की है।
दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी मैदान को प्रदर्शन के लिए नए निर्धारित स्थलों के रूप में पेश किया है।
यह मामला भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के अध्यक्ष उदय भानु चिब की उस याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन की अनुमति देने से दिल्ली पुलिस के इनकार को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा ने दलील दी कि जंतर-मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई किए जाने के बाद उदय भानु चिब की याचिका निष्फल हो गई है। हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि याचिका में उठाई गई अन्य मांगें अब भी विचारणीय हैं। उन्होंने इन मांगों पर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया।
दिल्ली पुलिस के वकील ने नोटिस जारी करने की मांग का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति महाजन ने याचिका में उठाई गई तीन प्रार्थनाओं पर नोटिस जारी किया।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले सक्षम अधिकारियों से राजधानी में शांतिपूर्ण और वैध विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थलों की पहचान करने और उन्हें निर्धारित करने पर विचार करने को कहा था। शीर्ष अदालत ने इन स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं और आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया था।
राजनीति
सुप्रिया सुले ने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर जताई चिंता, केंद्र से रिहाई की मांग

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी तथा उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप कर दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की।
सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “जंतर-मंतर पर तिरंगा थामना कोई अपराध नहीं है। सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी और उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने की खबर चिंताजनक है। मैं गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप करने और उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने का अनुरोध करती हूं।”
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए। असहमति लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर भारतीय को बिना भय के अपनी आवाज उठाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर अतिक्रमण के मामले में बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। जानकारी के अनुसार, सौरव दास को तिहाड़ जेल नंबर-2 और आशुतोष रांका को जेल नंबर-4 में रखा गया है। वहीं, इसी मामले में गिरफ्तार किए गए अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
सीजेपी नेताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभिष्ट हेला ने बताया कि अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा है। उन्होंने दावा किया कि यह आदेश पर्याप्त न्यायिक विचार किए बिना पारित किया गया और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने केवल आशंकाओं के आधार पर कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह मान लिया कि आरोपी कुछ कर सकते हैं और इसी आधार पर उन्हें पांच दिनों के लिए जेल भेज दिया गया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोगों को ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने और तिरंगा लहराने के लिए जेल भेजा जाना चिंताजनक है।
पुलिस के अनुसार, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर पुलिस बैरिकेड्स पार करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। तीनों नेता चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करने जा रहे थे। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी।
दिल्ली पुलिस ने हाल ही में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान बनाए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
सऊदी अरब में भारतीयों की तादाद ठीक-ठाक, दूतावास कर रहा हरसंभव मदद : विदेश मंत्रालय

भारत ने सऊदी अरब पर हो रहे मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक नागरिक या सार्वजनिक ठिकानों को निशाना बनाना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। बिगड़ते हालात के भारतीय दूतावास की तरफ से अपने नागरिकों को पहुंचाई जा रही हरसंभव मदद का भी उल्लेख किया।
बुधवार को पाक्षिक प्रेस ब्रीफिंग में एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हुए हमले को लेकर कहा, “सऊदी अरब पर कई हमले हुए हैं। कल अरामको मुख्यालय पर भी हमला हुआ। हम सऊदी अरब में आम लोगों के बुनियादी ढांचे पर हुए ऐसे सभी हमलों की निंदा करते हैं। हमारा मानना है कि ये हमले तुरंत बंद होने चाहिए। ये बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। हम सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए वहां की जनता और सरकार के साथ खड़े हैं, और हमें उम्मीद है कि इस इलाके में जल्द ही शांति और सामान्य स्थिति बहाल होगी।”
प्रवक्ता ने वहां रह रहे भारतीयों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “सऊदी अरब में हमारा दूतावास भारतीय समुदाय के लगातार संपर्क में है और उनकी भलाई के लिए एडवाइजरी जारी की है। हवाई अड्डों पर हमलों के कारण उड़ानों के शेड्यूल पर असर पड़ा है, जिससे भारतीय एयरलाइंस, खासकर रियाद, दम्मम, मदीना और जेद्दा से आने-जाने वाली उड़ानें प्रभावित हुई हैं। लेकिन कुछ सऊदी एयरलाइंस आ जा रही हैं। दूतावास यात्रियों और फंसे हुए लोगों को ताजा जानकारी दे रहा है। कह सकते हैं कि विकल्प तो हैं लेकिन साथ में दिक्कतें भी मौजूद हैं।”
हवाई अड्डे हमले में पीड़ितों, भारतीय प्रवासियों और धार्मिक यात्रा को लेकर पूछे सवाल पर जायसवाल ने कहा, “10 अक्टूबर के हमले में 12 लोग घायल हुए थे, जिनमें से एक की दुर्भाग्य से मौत हो गई। परिवार की इच्छानुसार, दूतावास की मदद से रियाद में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बाकी 11 घायलों में से तीन को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि आठ अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से चार आईसीयू में हैं। दूतावास के अधिकारी लगातार उनसे मिल रहे हैं और पीड़ित परिवारों के संपर्क में हैं। वहां भारतीय प्रवासियों और यात्रियों की संख्या ठीक-ठाक है और हम विदेश में अपने नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा की खातिर हर संभव मदद करने को तत्पर हैं।”
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