व्यापार
एआई सुरक्षा बाजार में तेज उछाल, 2027 तक 4.8 अरब डॉलर और 2028 तक 7.7 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान: रिपोर्ट
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग के साथ इसकी सुरक्षा पर होने वाला वैश्विक खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार को जारी गार्टनर की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, एआई प्रणालियों की सुरक्षा से जुड़ा वैश्विक बाजार 2027 में लगभग 4.8 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2026 की तुलना में 68.7 प्रतिशत अधिक होगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2028 तक यह बाजार बढ़कर लगभग 7.7 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
गार्टनर के वरिष्ठ प्रधान विश्लेषक शैलेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि इस तेज वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण संगठनों के सामने एआई प्रणालियों को सुरक्षित बनाने की बढ़ती आवश्यकता है। कंपनियां अब केवल एआई को अपनाने पर ही ध्यान नहीं दे रही हैं, बल्कि उससे जुड़े नए सुरक्षा जोखिमों, कमजोरियों और उन्नत साइबर खतरों से बचाव को भी प्राथमिकता दे रही हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई परियोजनाओं में तृतीय पक्ष और ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के बढ़ते उपयोग के कारण नई तरह की सुरक्षा चुनौतियां सामने आ रही हैं। आपूर्ति शृंखला पर होने वाले साइबर हमले और एआई प्रणालियों में मौजूद कमजोरियां संस्थानों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। यदि उपयुक्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था नहीं अपनाई गई तो एआई-आधारित कई परियोजनाओं के विफल होने का जोखिम बढ़ सकता है।
गार्टनर का अनुमान है कि 2029 तक एआई एजेंट्स पर होने वाले आधे से अधिक सफल साइबर हमले पहुंच नियंत्रण संबंधी कमजोरियों और प्रॉम्प्ट इंजेक्शन जैसी तकनीकों का फायदा उठाकर किए जाएंगे। इससे एआई सुरक्षा समाधानों की आवश्यकता और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार, एआई एप्लिकेशन सुरक्षा 2027 में भी खर्च की सबसे बड़ी श्रेणी बनी रहेगी और इस पर लगभग 851 मिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है, इसके बाद एआई उपयोग नियंत्रण श्रेणी का स्थान रहेगा, जिस पर लगभग 749 मिलियन डॉलर खर्च किए जाने की संभावना है।
हालांकि वृद्धि दर के लिहाज से एआई उपयोग नियंत्रण सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र होगा, जिसमें लगभग 73 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। इसके बाद एआई गेटवे श्रेणी में लगभग 70.9 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा सकती है।
उपाध्याय ने कहा कि जैसे-जैसे एआई रनटाइम सुरक्षा और समर्पित एआई गेटवे जैसी तकनीकें अधिक विश्वसनीय बनेंगी, संगठनों का इन समाधानों पर भरोसा बढ़ेगा और उनका उपयोग भी तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कंपनियां जैसे-जैसे अपने एआई कार्यक्रमों का विस्तार करेंगी, वैसे-वैसे विशेष एआई सुरक्षा समाधानों की मांग भी बढ़ती जाएगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्वायत्त एआई प्रणालियां नई प्रकार की कमजोरियां लेकर आती हैं, जिन्हें पारंपरिक निगरानी और सुरक्षा उपकरण पूरी तरह पहचान नहीं पाते। इसलिए संगठनों को एआई मॉडल की पहचान, निगरानी और सुरक्षा के लिए विशेष समाधान अपनाने होंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, एआई-आधारित सुरक्षा रणनीति केवल नए उपकरण खरीदने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। कंपनियों को अपनी मौजूदा साइबर सुरक्षा व्यवस्था को एआई सुरक्षा समाधानों के साथ एकीकृत करना होगा, ताकि वे उभरते खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
उपाध्याय ने कहा कि पारंपरिक साइबर सुरक्षा उपकरण अक्सर एआई अनुप्रयोगों को सामान्य सॉफ्टवेयर की तरह देखते हैं। यही कारण है कि एआई से जुड़े विशिष्ट खतरों से निपटने के लिए इन प्रणालियों में बड़े स्तर पर बदलाव और उन्नयन की आवश्यकता होगी। आने वाले वर्षों में एआई सुरक्षा को तकनीकी निवेश का एक केंद्रीय क्षेत्र माना जा रहा है, क्योंकि एआई का विस्तार जितनी तेजी से होगा, उससे जुड़े साइबर जोखिम भी उतनी ही तेजी से बढ़ेंगे।
राष्ट्रीय समाचार
भारत बन रहा वैश्विक आर्थिक शक्ति का नया केंद्र, एआई और बदलते पूंजी प्रवाह से बढ़ेंगे अवसर: रिपोर्ट

वैश्विक स्तर पर पूंजी प्रवाह में बदलाव, भू-राजनीतिक आधार पर बंटते व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत विकास की बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए बहुध्रुवीय दुनिया में एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। सोमवार को जारी ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में पूंजी प्रवाह, व्यापारिक रिश्तों और उद्योगों की संरचना तेजी से बदल रही है। एआई क्रांति शुरू हो चुकी है, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का विस्तार नए निर्यात अवसर पैदा कर रहा है और शहरीकरण की गति लगातार बढ़ रही है।
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री टॉम ऑर्लिक ने कहा कि इन सभी बदलावों के बीच भारत विकास में मौजूद कई बाधाओं को कम करते हुए वैश्विक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का विस्तार होता मुक्त व्यापार नेटवर्क 2035 तक देश की जीडीपी में 140 अरब डॉलर से 170 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त योगदान दे सकता है। विनिर्माण लागत कम करने और कृषि क्षेत्र से श्रमिकों को अधिक उत्पादक क्षेत्रों में स्थानांतरित करने जैसे घरेलू सुधार इन लाभों को और बढ़ा सकते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक पूंजी प्रवाह अब पहले की तुलना में अधिक केंद्रित और राजनीतिक होता जा रहा है। प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच पूंजी निवेश मित्र देशों की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत कम है, जबकि निवेश का बड़ा हिस्सा एआई और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है।
भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र की मजबूत मांग और विभिन्न देशों द्वारा दिए जा रहे निवेश प्रोत्साहनों के बीच वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने की अपनी गति बनाए रखे।
रिपोर्ट के मुताबिक, एआई भारत की आर्थिक वृद्धि दर में हर साल 0.9 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकता है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बुनियादी ढांचे की सीमाएं एआई से मिलने वाले लाभ को कुछ हद तक सीमित कर सकती हैं। विशेष रूप से भारत का आईटी सेवा क्षेत्र अवसरों और चुनौतियों दोनों का सामना करेगा। एआई जहां कंपनियों को उच्च मूल्य वाली सेवाओं की ओर ले जा सकता है, वहीं स्वचालन कम लागत वाले श्रम आधारित मॉडल को चुनौती भी दे सकता है।
रिपोर्ट में भारत के शहरीकरण को भी एक बड़ी ताकत बताया गया है। इसके अनुसार, करीब 82 करोड़ भारतीय शहरी वातावरण में रहते हैं। यदि नगर प्रशासन, बुनियादी ढांचे और भूमि उपयोग योजना को और मजबूत किया जाता है, तो यह शहरी आबादी उत्पादकता वृद्धि का एक बड़ा स्रोत बन सकती है।
व्यापार
सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच हरे निशान में खुला बाजार, सेंसेक्स में 412 अंकों की बढ़त; निफ्टी में 0.58 प्रतिशत की तेजी

एशियाई बाजारों में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जैसे सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में खुला, जबकि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ।
सेंसेक्स अपने पिछले बंद 72,472.33 से 298.99 अंक यानी 0.41 प्रतिशत बढ़कर 72,771.32 पर खुला, तो वहीं निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 22,520.45 से 72.75 अंक यानी 0.32 प्रतिशत चढ़कर 22,593.20 पर खुला।
हालांकि दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 411.92 अंकों यानी 0.56 प्रतिशत की तेजी के साथ 72884.25 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 50 का दिन का उच्चतम स्तर 22,651.10 रहा, जो 130.65 अंकों यानी 0.58 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है।
व्यापक बाजार ने प्रमुख बेंचमार्कों से बेहतर प्रदर्शन किया, जिसमें निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.3 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.40 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई।
वहीं सेक्टरवार देखें तो निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल्स, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी फार्मा इंडेक्स में बढ़त देखी गई, जबकि निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी आईटी और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में बिकवाली का दबाव रहा।
इस बीच, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 97 पैसे मजबूत होकर 95.76 पर खुला, जबकि इससे पहले यह 96.73 पर बंद हुआ था।
वैश्विक स्तर पर, एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला, जहां दक्षिण कोरिया के कोस्पी और कोस्डैक में 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी शेयर बाजार पिछले सप्ताह बढ़त के साथ बंद हुआ, शुक्रवार को तीनों प्रमुख अमेरिकी शेयर सूचकांकों में तेजी आई और इस तरह साप्ताहिक बढ़त दर्ज की गई।
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, ब्रेंट तेल की कीमतें 103 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गईं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घरेलू सकारात्मक कारकों की तुलना में वैश्विक चुनौतियां अधिक प्रभाव डाल रही हैं। उनके अनुसार, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें अभी भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) निकट अवधि में बिकवाली जारी रख सकते हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) उनकी बिकवाली को काफी हद तक संतुलित करते रहेंगे।
हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वित्त वर्ष 2027 में 7.1 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि अनुमान और कॉर्पोरेट मुनाफे में सुधार जैसे मजबूत बुनियादी कारक बाजार को समर्थन दे रहे हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे माहौल में निवेशक बाजार की अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज करते हुए उचित मूल्यांकन वाले ग्रोथ शेयरों में निवेश जारी रख सकते हैं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा बाजार अच्छे खरीदारी अवसर प्रदान कर रहा है।
उनका यह भी मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में सकारात्मक घटनाक्रम के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आती है, तो मौजूदा स्तरों से बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिल सकती है।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, शुक्रवार की रिकवरी और चार्ट पर बने पैटर्न से 22,800 से 23,200 के दायरे तक तेजी की संभावना बनी हुई है। हालांकि यदि निफ्टी 22,575 के ऊपर बंद होने में विफल रहता है, तो बाजार पर मंदड़ियों की पकड़ बनी रह सकती है। दिन के लिए 22,295 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है।
इस बीच, एशियाई बाजारों में भी निवेशक सतर्क बने हुए हैं क्योंकि अब उनकी नजर कॉर्पोरेट नतीजों के सीजन पर है। विश्लेषकों का कहना है कि यह सीजन तकनीकी कंपनियों के ऊंचे वैल्यूएशन की परीक्षा ले सकता है।
वहीं कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। रूस और अन्य पक्षों के बीच ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने संबंधी समझौते के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं कुछ कम हुई हैं, जिससे तेल की कीमतों पर दबाव बना है।
कुल मिलाकर, बाजार की दिशा आगे भी वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की चाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर काफी हद तक निर्भर रहने की संभावना है।
राष्ट्रीय समाचार
एस जयशंकर की घाना, आइवरी कोस्ट और इथियोपिया यात्रा से भारत-अफ्रीका संबंधों को मिली नई गति

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की घाना, कोट डी आइवर और इथियोपिया की पांच दिवसीय यात्रा (6-10 अक्टूबर) से भारत के इन तीन अफ्रीकी देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई रफ्तार मिली है। यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल तकनीक, कौशल विकास और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारत और घाना ने शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक अनुसंधान तथा कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए दो समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। उनके अनुसार, जयशंकर ने घाना में राष्ट्रपति जॉन द्रामानी महामा से मुलाकात की और उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं। दोनों पक्षों ने जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की घाना यात्रा के बाद भारत-घाना साझेदारी में आई तेजी की समीक्षा की।
जयशंकर ने घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुडजेटो अबलाक्वा के साथ द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, निवेश, विकास साझेदारी, दवा उद्योग, क्षमता निर्माण, रक्षा, प्रौद्योगिकी और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा की। इसके अलावा पश्चिम अफ्रीका, पश्चिम अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक समुदाय (इकोवास), अफ्रीकी संघ, संयुक्त राष्ट्र में सुधार और ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग जैसे मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
विदेश मंत्री ने घाना के आंतरिक मामलों, शिक्षा, मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि तथा पर्यटन, संस्कृति और रचनात्मक कला से जुड़े मंत्रियों से भी मुलाकात की। उन्होंने वहां भारतीय समुदाय के सदस्यों और भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के पूर्व प्रतिभागियों से भी संवाद किया।
संयुक्त मीडिया वार्ता के दौरान जयशंकर ने क्षतिपूर्ति न्याय और सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी के मुद्दों पर घाना के नेतृत्व की सराहना की। घाना ने भारत की उस भूमिका को भी स्वीकार किया, जिसके तहत भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को समूह की स्थायी सदस्यता दिलाने में योगदान दिया गया।
जयशंकर और अबलाक्वा ने भारत के ‘एक पेड़ मां के नाम’ और घाना की ‘ट्री फॉर लाइफ’ पहल के समर्थन में विदेश मंत्रालय परिसर में प्लूमेरिया का पौधा लगाया। जयशंकर ने घाना फॉरेन सर्विस इंस्टीट्यूट में ‘भारत, घाना और ग्लोबल साउथ’ विषय पर व्याख्यान भी दिया। उन्होंने क्वामे नक्रूमा मेमोरियल पार्क का दौरा किया और अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस के लिए घाना का स्वीकृति पत्र प्राप्त किया।
दोनों देशों ने दवा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र, खनन, रक्षा, रेलवे, डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृषि मशीनीकरण, मूल्य संवर्धन, औद्योगीकरण और रोजगार सृजन को भविष्य में सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया।
कोट डी आइवर में जयशंकर ने राष्ट्रपति अलासाने औटारा से मुलाकात की और उन्हें राष्ट्रपति मुर्मू तथा प्रधानमंत्री मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं। उन्होंने राष्ट्रपति के साथ मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी के साझा दृष्टिकोण पर चर्चा की।
विदेश मंत्री ने उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री तेने बिराहिमा औटारा के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग की बढ़ती संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। इसके अलावा विदेश मामलों एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग की राज्य मंत्री नियाले काबा के साथ बैठक में दोनों देशों के संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई।
भारत और कोट डी आइवर के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1.5 अरब डॉलर से अधिक है। दोनों पक्षों ने निवेश, स्थानीय विनिर्माण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के जरिए व्यापार को और बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। कृषि एवं कृषि प्रसंस्करण, स्वास्थ्य, दवा उद्योग, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, शिक्षा और क्षमता निर्माण को भी सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया गया।
जयशंकर ने कोट डी आइवर में आईटीईसी कार्यक्रम के पूर्व प्रतिभागियों से मुलाकात की। इस बातचीत में राष्ट्रीय शिक्षा, साक्षरता एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री एन’गुएसान कोफी भी शामिल हुए। बैठक में कौशल विकास और प्रशिक्षण को दोनों देशों की साझेदारी मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। उन्होंने भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी बातचीत की और देश के आर्थिक विकास तथा द्विपक्षीय मित्रता को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की।
इथियोपिया में जयशंकर ने प्रधानमंत्री अबी अहमद अली से मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अबी अहमद को दोबारा निर्वाचित होने पर बधाई दी और प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तिगत संदेश भी सौंपा।
जयशंकर ने इथियोपिया के विदेश मंत्री गेदियोन टिमोथेवोस के साथ व्यापक चर्चा की। दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, रक्षा, खनन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। क्षेत्रीय घटनाक्रम और साझा हितों से जुड़े वैश्विक मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे।
विदेश मंत्री ने इथियोपिया के नेशनल पैलेस म्यूजियम, साइंस म्यूजियम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंस्टीट्यूट का दौरा किया। उन्होंने अडवा विक्ट्री म्यूजियम में स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, राजनयिकों तथा शिक्षाविदों को संबोधित किया। अपने व्याख्यान में उन्होंने अफ्रीका के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी और समकालीन बहुपक्षीय सहयोग को आकार देने में ग्लोबल साउथ की सामूहिक भूमिका को रेखांकित किया।
इथियोपिया के साथ भारत की विकास साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए जयशंकर ने वहां जयपुर कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर का अगला संस्करण आयोजित करने की घोषणा की। वर्ष 2024 में इथियोपिया के अफार क्षेत्र में आयोजित शिविर से लगभग 450 लोगों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए थे।
भारत ने इथियोपियाई अधिकारियों के लिए फॉरेंसिक विज्ञान, महिला एवं बाल विकास और मीडिया प्रशासन के क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने की भी पेशकश की। इससे मानव संसाधन विकास और संस्थागत क्षमता निर्माण में दोनों देशों के सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
अदीस अबाबा में जयशंकर ने अफ्रीका में तैनात भारतीय राजदूतों और उच्चायुक्तों के क्षेत्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता भी की। सम्मेलन में अफ्रीकी महाद्वीप के साथ भारत की साझेदारी को और मजबूत करने के लिए रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इथियोपिया की यात्रा ने भारत-इथियोपिया रणनीतिक साझेदारी को नई गति दी। यह यात्रा दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की इथियोपिया यात्रा और सितंबर 2026 में प्रधानमंत्री अबी अहमद की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते उच्चस्तरीय संपर्कों की कड़ी है।
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