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Wednesday,14-October-2026
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अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, हॉर्मुज स्ट्रेट के पास 7 घंटे चली सैन्य कार्रवाई

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अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास और तटीय क्षेत्रों में दर्जनों ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए सात घंटे तक हमले किए।

सेंटकॉम ने अपने एक बयान में कहा कि यह ऑपरेशन रात 10 बजे (अमेरिकी समयानुसार) खत्म हुआ। अमेरिकी लड़ाकू विमानों, ड्रोन और नौसैनिक जहाजों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन साइटों, नौसैनिक क्षमताओं और तटीय रक्षा प्रणालियों पर सटीक हमले किए।

अमेरिकी कमांड के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना था, जिसके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और नागरिक चालक दल के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

हॉर्मुज स्ट्रेट वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ये हमले उसी दिन हुए जब अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले जहाजों के खिलाफ अपनी नाकाबंदी फिर से शुरू की। यह नाकाबंदी अमेरिकी समयानुसार शाम 4 बजे लागू हुई।

कमांड ने बताया कि मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसेना के 20 से अधिक युद्धपोत और सैकड़ों सैन्य विमान तैनात थे। उसने कहा कि अमेरिकी सेना सतर्क, घातक और तैयार है। अमेरिकी कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि अमेरिकी सेना की यह हालिया कार्रवाई कमर्शियल जहाजों और पड़ोसी खाड़ी देशों पर ईरान के कई हमलों के जवाब में की गई है।

कूपर ने कहा कि पिछले सात दिनों में, ईरान ने इस इलाके में जान-बूझकर आम नागरिकों को निशाना बनाते हुए सात कमर्शियल जहाजों पर हमले किए हैं, जिनमें लगभग एक दर्जन नागरिक क्रू मेंबर मारे गए, लापता हुए या घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी सेना ने पड़ोसी खाड़ी देशों की ओर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन भी दागे हैं।

कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने आगे कहा, “अमेरिकी सेना ईरान को उस गैर-जरूरी आक्रामकता के लिए जिम्मेदार ठहरा रही है जिससे बेगुनाह लोगों की जान को खतरा बना हुआ है।”

हालांकि, अमेरिकी कमांड ने उन ठिकानों की सटीक जानकारी नहीं दी, जहां हमले किए गए। उसने नुकसान का आकलन भी नहीं बताया और न ही यह बताया कि कोई हताहत हुआ या नहीं।

कमांड ने उन व्यापारिक जहाजों की पहचान भी सार्वजनिक नहीं की, जिनका जिक्र एडमिरल कूपर ने किया था। साथ ही, चालक दल के सदस्यों की राष्ट्रीयता या उन खाड़ी देशों के नाम भी नहीं बताए गए, जिन्हें कथित रूप से ईरानी मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया।

सेंट्रल कमांड ने कहा कि अमेरिकी सेना कमांडर-इन-चीफ के आदेश पर आगे के ऑपरेशन करने के लिए तैयार है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

सऊदी अरब में भारतीयों की तादाद ठीक-ठाक, दूतावास कर रहा हरसंभव मदद : विदेश मंत्रालय

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भारत ने सऊदी अरब पर हो रहे मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक नागरिक या सार्वजनिक ठिकानों को निशाना बनाना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। बिगड़ते हालात के भारतीय दूतावास की तरफ से अपने नागरिकों को पहुंचाई जा रही हरसंभव मदद का भी उल्लेख किया।

बुधवार को पाक्षिक प्रेस ब्रीफिंग में एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हुए हमले को लेकर कहा, “सऊदी अरब पर कई हमले हुए हैं। कल अरामको मुख्यालय पर भी हमला हुआ। हम सऊदी अरब में आम लोगों के बुनियादी ढांचे पर हुए ऐसे सभी हमलों की निंदा करते हैं। हमारा मानना ​​है कि ये हमले तुरंत बंद होने चाहिए। ये बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। हम सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए वहां की जनता और सरकार के साथ खड़े हैं, और हमें उम्मीद है कि इस इलाके में जल्द ही शांति और सामान्य स्थिति बहाल होगी।”

प्रवक्ता ने वहां रह रहे भारतीयों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “सऊदी अरब में हमारा दूतावास भारतीय समुदाय के लगातार संपर्क में है और उनकी भलाई के लिए एडवाइजरी जारी की है। हवाई अड्डों पर हमलों के कारण उड़ानों के शेड्यूल पर असर पड़ा है, जिससे भारतीय एयरलाइंस, खासकर रियाद, दम्मम, मदीना और जेद्दा से आने-जाने वाली उड़ानें प्रभावित हुई हैं। लेकिन कुछ सऊदी एयरलाइंस आ जा रही हैं। दूतावास यात्रियों और फंसे हुए लोगों को ताजा जानकारी दे रहा है। कह सकते हैं कि विकल्प तो हैं लेकिन साथ में दिक्कतें भी मौजूद हैं।”

हवाई अड्डे हमले में पीड़ितों, भारतीय प्रवासियों और धार्मिक यात्रा को लेकर पूछे सवाल पर जायसवाल ने कहा, “10 अक्टूबर के हमले में 12 लोग घायल हुए थे, जिनमें से एक की दुर्भाग्य से मौत हो गई। परिवार की इच्छानुसार, दूतावास की मदद से रियाद में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बाकी 11 घायलों में से तीन को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि आठ अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से चार आईसीयू में हैं। दूतावास के अधिकारी लगातार उनसे मिल रहे हैं और पीड़ित परिवारों के संपर्क में हैं। वहां भारतीय प्रवासियों और यात्रियों की संख्या ठीक-ठाक है और हम विदेश में अपने नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा की खातिर हर संभव मदद करने को तत्पर हैं।”

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा के हालात नाजुक, पुलिस फायरिंग में एक शख्स की मौत

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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में गवर्नर शासन लागू किए जाने के विरोध में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रांत में आपातकाल लागू होने के बाद राजनीतिक तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।

संघीय सरकार की ओर से रविवार को आपातकाल की घोषणा और खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू किए जाने के बाद हालात बिगड़ गए हैं। इस कदम से जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार का कामकाज निलंबित हो गया है।

सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में सड़क पर गोलीबारी होती दिखाई दे रही है। वीडियो में हथियारबंद सुरक्षाकर्मी लोगों का पीछा करते नजर आ रहे हैं, जबकि कई लोग जान बचाने के लिए भागते दिख रहे हैं। एक अन्य वीडियो में पुलिसकर्मियों को लाठियों से लोगों की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्थानीय मीडिया ने पुलिस के हवाले से बताया कि मंगलवार को गवर्नर शासन के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रांत के बारा बाजार इलाके में राष्ट्रीय डेटाबेस एवं पंजीकरण प्राधिकरण (नादरा) के एक कार्यालय में आग लगा दी। इस दौरान कथित तौर पर 15 पुलिसकर्मियों को भी बंधक बना लिया गया।

पीटीआई के विधायक इकबाल अफरीदी ने दावा किया कि हिंसा में पार्टी के 11 कार्यकर्ता घायल हुए और एक की मौत हो गई। पाकिस्तानी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के अनुसार, इन हताहतों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

खैबर जिले के पुलिस अधिकारी वकार अहमद के मुताबिक, मंगलवार दोपहर पीटीआई के सैकड़ों समर्थक गवर्नर शासन के विरोध में बारा बाजार में एकत्र हुए थे। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और कथित तौर पर गोलियां चलाईं। इसके बाद प्रदर्शनकारी कुछ समय के लिए वहां से हट गए।

करीब 90 मिनट बाद तनाव फिर बढ़ गया, जब प्रांतीय विधानसभा के सदस्य अब्दुल गनी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों का एक और बड़ा समूह मीनार चौक से बारा चौक की ओर मार्च करते हुए पहुंचा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए।

वकार अहमद ने बताया कि चौराहे पर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और यातायात संकेतकों में आग लगा दी।

इसके बाद हालात और बिगड़ गए। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने तहसील नगरपालिका कार्यालय के भीतर 15 पुलिसकर्मियों को बंद कर दिया और उनके हथियार तथा वर्दियां अपने कब्जे में ले लीं।

पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि कम से कम पांच प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने अशांति फैलाने की कथित कोशिश के आरोप में 50 लोगों को गिरफ्तार भी किया।

हालांकि, पेशावर के तीन प्रमुख अस्पतालों में शामिल हयाताबाद मेडिकल कॉम्प्लेक्स के एक डॉक्टर ने ‘डॉन’ को बताया कि अस्पताल में एक दर्जन से अधिक घायलों को लाया गया है। इनमें चार पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

प्रदर्शन खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू किए जाने के विरोध में किए गए। इस फैसले के बाद पीटीआई नेता सोहेल अफरीदी की प्रांत के मुख्यमंत्री के रूप में भूमिका भी प्रभावहीन हो गई है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

जेलेंस्की का आरोप, ‘रूस ने उन ऊर्जा ठिकानों को भी बनाया निशाना जो सीजफायर के दायरे में’

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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस ने रातभर में 39 बैलिस्टिक मिसाइलों और 120 से अधिक हमलावर ड्रोन तथा लोइटरिंग म्यूनिशन से यूक्रेन के ऊर्जा और महत्वपूर्ण केंद्रों को निशाना बनाया। उन्होंने ‘एनर्जी ट्रूस’ को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये वही ऊर्जा केंद्र थे जो ट्रंप के सीजफायर घोषणा के दायरे में थे। जेलेंस्की के अनुसार, हमलों के कारण कम से कम छह लाख लोग बिजली से वंचित हो गए हैं।

जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन को अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर उपलब्ध कराने की अपील करते हुए कहा, “रूसी हमलों में कीव, कीव क्षेत्र और खार्किव के ऊर्जा एवं महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। ऊर्जा केंद्रों पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला जानबूझकर किया गया। यह वही बुनियादी ढांचा है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से घोषित युद्धविराम के दायरे में शामिल किया गया था।”

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने माना कि हमलों का पैमाना ‘रूस की ओर से अमेरिका के प्रति खुले अनादर को दर्शाता है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि रूस अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने बताया कि हमलों से देश की बिजली व्यवस्था से जुड़े 26 केंद्रों और तेल एवं गैस क्षेत्र की चार सुविधाओं को काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आशंका जताई कि बिजली कटौती का दायरा और बढ़ सकता है।

उन्होंने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील करते हुए कहा, “रूस ने तनाव कम करने का अवसर गंवा दिया है और युद्ध जारी रखने का रास्ता चुना है।”

हमेशा की तरह उन्होंने एक बार फिर रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया। उन्होंने अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा कि वह हाल में पारित होकर कानून बन चुका है और रूस के खिलाफ ऐसे कदमों को अधिकृत एवं विनियमित करता है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति के पास दबाव और ताकत के जरिए शांति की दिशा में आगे बढ़ने के प्रभावी साधन मौजूद हैं। अमेरिका, यूरोप और अन्य सहयोगी देशों से अपील है कि यूक्रेन को अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर दें।”

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