राष्ट्रीय
फिनटेक के लिए नकदी की कमी का मतलब प्रतिभा की कमी, सिर्फ जुझारू लोग ही बने रहेंगे
भारत में फिनटेक यूनिकॉर्न की कहानी 2015 में शुरू हुई, जब विजय शेखर शर्मा का पेटीएम भारत का पहला फिनटेक यूनिकॉर्न बन गया।
तब से, जून 2022 तक भारत में फिनटेक यूनिकॉर्न की कुल संख्या 21 है, जो ईकॉमर्स के 24 यूनिकॉर्न के बाद दूसरे स्थान पर है।
फिनटेक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध प्रतिभा में अंतर और उद्योग को विकसित करने के लिए आवश्यक कौशल के बारे में बात कर रहे हैं। हालांकि, नकदी की कमी प्रतिभा की कमी को और बदतर बना देगी। केवल कठिन लोग ही बने रहेंगे।
किसी भी सनराइज इंडस्ट्री की तरह, पूंजी जुटाने और जलाने की दौड़ ने पिछले कुछ वर्षो में फिनटेक को भी प्रभावित किया। नतीजतन, बहुत सारी कंपनियां पैसा नहीं जुटा पा रही हैं।
वैश्विक स्तर पर घटते बाजार की स्थितियों के बारे में सतर्क होने के कारण वेंचर कैपिटल फर्मो ने नए चेक लिखने पर ब्रेक लगा दिया है। इसलिए, उद्योग जगत के लीडर अगले 24 महीनों में फिनटेक बाजार में बड़े पैमाने पर समेकन की उम्मीद कर रहे हैं।
यहां तक कि उनके लिए भी जो अच्छी तरह से पूंजीकृत हैं, बाजार की स्थितियों में बदलाव से लाभप्रदता पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित होगा। यहां सवाल यह है कि क्या मूल वृद्धि फुलाए गए मूल्यांकन के आधार पर थी या नहीं।
उदाहरण के लिए, उप 20 मिलियन डॉलर राजस्व पर 500 मिलियन डॉलर की वृद्धि बुरी खबर हो सकती है। केवल वास्तविक राजस्व वाली कंपनियां ही इस अवधि को देख पाएंगी।
भुगतान यूनिकॉर्न एनआईयूएम के सह-संस्थापक प्रतीक गांधी ने कहा, “दुनिया भर में, निवेशक फंड करने की भूख खो रहे हैं। गिरते बाजार में जहां मंदी का खतरा है, वहां उम्मीद है कि मूल्यांकन और गिर सकता है।”
उन्होंने कहा, “वह समय जब फिनटेक बहीखाते पर बिना किसी वास्तविक राजस्व के धन जुटा सकता था, वह अब बीत चुका है। फिनटेक को अब किसी भी कीमत पर केवल बाजार हिस्सेदारी हासिल करने पर काम करने के बजाय मुनाफे पर ध्यान देना होगा।”
एनआईयूएम का मूल्य 2 अरब डॉलर से अधिक है और उन फिनटेक में से एक है जिनका पुस्तकों पर वास्तविक राजस्व है। प्रतीक गांधी कहते हैं, “हम उम्मीद करते हैं कि मजबूत बिजनेस मॉडल और कैश ऑन बुक्स की वजह से हम बाजार से मिले मौके का फायदा उठा पाएंगे।”
स्पष्ट रूप से, अगले कुछ वर्षो में, जो सबसे अधिक मायने रखता है वह है बढ़ता और भुगतान करने वाला ग्राहक आधार, बेहतर वित्तीय साक्षरता और दीर्घकालिक मूल्य के साथ अस्थिरता का मुकाबला करने की क्षमता। लेकिन इसे पेश करने के लिए, इस क्षेत्र को ‘ट्र इनोवेशन’ की जरूरत है और इसे हासिल करने के लिए फिनटेक को सफल प्रतिभा की जरूरत है।
इस बार टेलेंट वॉर अधिक क्रूर है, क्योंकि काम पर रखने और प्रयोग करने के लिए मुफ्त पैसा कम हो गया है। कई फिनटेक ने लोगों की छंटनी शुरू कर दी है।
गोल्ड लोन प्रदाता रुपीक ने 200 कर्मचारियों की छंटनी की है। कनाडा की फिनटेक दिग्गज वेल्थसिंपल, जिसकी कीमत पिछले साल तक 4 अरब डॉलर आंकी गई थी, 159 लोगों (अपने कर्मचारियों की 13 प्रतिशत) की छंटनी कर रही है।
भारत में उपस्थिति के साथ न्यूयॉर्क मुख्यालय वाली फिनटेक स्टार्टअप दलूपा ने हाल ही में उसने अपने नोएडा कार्यालय से लगभग 40-50 कर्मचारियों की छंटनी की है।
वहीं दूसरी ओर अच्छे टैलेंट को आक्रामकता से लुभाया जा रहा है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड की कहिना वैन डाइक कहती हैं, “प्रतिभा के लिए युद्ध खत्म हो गया है। प्रतिभा जीत गई है। यह दर्शाता है कि ये छंटनी उन लोगों के लिए जगह बनाएगी जो वास्तव में सुई को भी ऐसे प्रोडक्ट्स की पेशकश करने की ओर ले जा सकने की श्रमता रखते हैं, जिससे लेनदेन का निर्माण हो।”
सवाल यह है कि क्या टैलेंट की कमी को दूर करने वाली फिनटेक नकदी की कमी को दूर कर पाएगी?
एक दूसरे पर कितना निर्भर है? आइए प्रतीक्षा करें और देखें।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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