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Monday,12-October-2026
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राजनीति

कांग्रेस ने ‘लॉटरी किंग’ से भाजपा के कथित संबंध की जांच की मांग की

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तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) के अध्यक्ष के.एस. अलागिरी ने आरोप लगाया कि भाजपा को 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन से 100 करोड़ रुपये की राशि मिली है। कांग्रेस ने इसकी ‘पारदर्शी और निष्पक्ष जांच’ की मांग की है। कांग्रेस नेता ने आश्चर्य व्यक्त किया कि इतनी बड़ी धनराशि लेने के लिए भाजपा मार्टिन की किस तरह मदद करेगी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि मार्टिन जैसे लोग कानून के लंबे हाथ से खुद को बचाने के लिए भाजपा को भारी धन मुहैया करा रहे हैं। के.एस. अलागिरी ने कहा कि भाजपा और मार्टिन जैसे लोगों के बीच संबंधों की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता ने आश्चर्य जताया कि क्या भाजपा मार्टिन को उनके खिलाफ दर्ज आयकर मामलों से उबरने में मदद करेगी और कहा कि एक राजनीतिक दल के रूप में भाजपा इस पर पूरी तरह से बेनकाब हो चुकी है।

सैंटियागो मार्टिन पूर्वोत्तर राज्यों में लॉटरी व्यवसाय के साथ कोयंबटूर में स्थित एक लॉटरी किंग हैं। माना जाता है कि उनके पास 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है और ईडी ने कोयंबटूर और देश के अन्य हिस्सों में उसके परिसरों पर कई छापे मारे थे। मार्टिन म्यांमार में एक श्रमिक ठेकेदार थे और 1988 में तमिलनाडु वापस आ गये और उन्होंने अपना लॉटरी का व्यवसाय शुरू किया। करुणानिधि सरकार के दौरान उन्हें कई आरोपों के तहत जेल में डाल दिया गया था। वह केरल की माकपा सरकार के भी करीबी थे और उन्होंने पार्टी के खजाने में उदारतापूर्वक दान दिया था और पार्टी नेताओं द्वारा इसके मुखपत्र ‘देशाभिमानी’ के विज्ञापन के रूप में 2 करोड़ रुपये स्वीकार करने का आरोप लगाया गया था।

राजनीति

सीएमआरएल-एक्सालॉजिक स्कैम: पूर्व सीएम पिनाराई विजयन और रियास दो अलग-अलग मामलों में पहले आरोपी बनाए गए

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केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और सीपीआई (एम) विधायक और पूर्व मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास को अलग-अलग मामलों में पहला आरोपी बनाया गया है। विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) की ओर से सोमवार को विजिलेंस कोर्ट में विवादित मामलों में दो एफआईआर दर्ज कराएगी।

पहला केस सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मंथली पेमेंट से जुड़ा है, जिसमें विजयन पहले आरोपी हैं। दूसरा केस रियास को मिले कथित करप्शन के पैसे से जुड़ा है, जो दूसरे एलडीएफ कैबिनेट में टूरिज्म मिनिस्टर थे और विजयन की बेटी टी. वीना के पति हैं। वीना दोनों केस में दूसरी आरोपी हैं।

केरल हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के उस निर्देश के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसमें कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) की ओर से एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को किए गए मंथली पेमेंट और सरकारी पद पर बैठे लोगों द्वारा कंपनी को दिए गए कथित फायदों से जुड़े आरोपों की पूरी जांच करने और केस दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री विजयन की बेटी वीना की यह कंपनी है। सीएमआरएल-एक्सालॉजिक ट्रांजैक्शन से जुड़े पहले केस में, विजयन पहले आरोपी और वीना दूसरी आरोपी होंगी।

वहीं, दूसरे केस में पी.ए. मोहम्मद रियास पहले आरोपी और वीना दूसरी आरोपी होंगी। दोनों एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग आरोपों, पेमेंट और कथित फेवर से जुड़े हालात की जांच की जाएगी। हाई कोर्ट ने विजिलेंस को शुरुआती जांच करने के बजाय एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने सरकार की मंजूरी के बिना स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाने के पुलिस चीफ के आदेश को भी रद्द कर दिया था। सरकार से उम्मीद है कि वह विजिलेंस डायरेक्टर द्वारा सुझाई गई स्पेशल टीम को नियुक्त करने के लिए एक नया आदेश जारी करेगी, जो ऐसी टीम बनाने के अधिकार पर कोर्ट की टिप्पणियों के अनुसार होगा।

क्राइम ब्रांच के पास मौजूद सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स विजिलेंस को सौंप दिए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि हाईकोर्ट के खास निर्देश को देखते हुए जांच आगे बढ़ाने के लिए पहले से मंजूरी की जरूरत नहीं है। इस बीच, घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने कहा कि विजयन सोमवार को बाद में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने एक याचिका के साथ आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी गई है।

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महाराष्ट्र

एमपीएससी में गड़बड़ियों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बनाई समिति, तुकाराम मुंडे को मिली सचिव की जिम्मेदारी

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महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) में गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर जारी उम्मीदवारों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आयोग से जुड़े मामलों की जांच और सुधार के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे को समिति का सचिव नियुक्त किया गया है।

जानकारी के अनुसार राज्य सरकार का यह फैसला रविवार को सामने आया। राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने पुणे में एसएम जोशी पुल पर आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों से मुलाकात के दौरान समिति के गठन की जानकारी दी। यहां उम्मीदवार पिछले 10 दिनों से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग में सुधार समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। तुकाराम मुंडे के अलावा इसमें लक्ष्मी गौतम, गणेश पाटील और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाइक को शामिल किया गया है। समिति से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर विचार करने की अपेक्षा है।

सरकार के इस फैसले को आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों की मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की मांग पर सरकार ने क्या निर्णय लिया है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं हुआ है।

आंदोलनकारी उम्मीदवारों की मांगों में केवल महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार ही शामिल नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन में शामिल कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने, अगले तीन वर्षों में 70 हजार पदों पर भर्ती करने और जनवरी में प्रस्तावित ग्रुप-सी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग भी उठाई है।

इसके अलावा, उम्मीदवारों ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी अन्य मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग उम्मीदवारों के आंदोलन का समर्थन कर रहे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पाटील ने समिति में तुकाराम मुंडे को शामिल किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलेगा। सरकार की ओर से समिति गठित किए जाने के बाद महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की भी खबर है।

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राष्ट्रीय समाचार

अधूरे इश्क ने उठवाई कलम, अल्फाज ऐसे कि लाखों दिलों की आवाज बन गए निदा फाजली

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शायरी करना आसान हो सकता है लेकिन ऐसे अल्फाज लिखना बहुत मुश्किल है, जिन्हें पढ़कर किसी को अपना दर्द याद आ जाए, किसी को मोहब्बत का एहसास हो और किसी को जिंदगी जीने का नया नजरिया मिल जाए। हिंदी और उर्दू साहित्य में निदा फाजली एक ऐसा ही नाम हैं, जिनकी शायरी सीधे दिल तक पहुंचती है। उन्होंने आम आदमी की जिंदगी, उसके संघर्ष, रिश्तों, मोहब्बत और इंसानियत को इतने सरल शब्दों में बयां किया कि उनके शेर लोगों की जुबान पर चढ़ गए। आज भी उनकी शायरी पढ़ते हुए लगता है, जैसे उन्होंने हमारे ही मन की बात कह दी हो।

निदा फाजली का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में हुआ था। उनका असली नाम मुक्तदा हसन था। बचपन ग्वालियर में बीता और वहीं उनकी पढ़ाई-लिखाई हुई। उनके पिता मुर्तुजा हसन भी शायरी करते थे, इसलिए साहित्य से उनका परिचय बचपन से ही हो गया था। हालांकि, निदा की शायरी की आवाज धीरे-धीरे जिंदगी के अनुभवों से निखरी।

कॉलेज के दिनों में उन्हें एक लड़की से लगाव हो गया था। वह लड़की उनके आगे की पंक्ति में बैठा करती थी। फिर एक दिन कॉलेज के नोटिस बोर्ड पर खबर मिली कि एक दुर्घटना में उसकी मौत हो गई। यह खबर निदा के लिए गहरा सदमा थी। उनके भीतर जो दर्द उमड़ा, उसे बयां करने के लिए उनके पास शब्द ही नहीं थे। यही एहसास उन्हें अपनी भावनाओं को समझने और उन्हें अल्फाज देने की तरफ ले गया।

कहा जाता है कि एक सुबह निदा फाजली मंदिर के पास से गुजर रहे थे। वहां उन्होंने सूरदास का भजन सुना— ‘मधुबन तुम क्यौं रहत हरे?’ कृष्ण के वियोग में दुखी राधा और गोपियों की भावनाओं को व्यक्त करने वाला यह भजन उनके दिल में उतर गया। उन्हें लगा कि विरह और बिछड़ने का दर्द केवल उनका निजी अनुभव नहीं है। इसके बाद उन्होंने कबीर, तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई और बाबा फरीद जैसे रचनाकारों को पढ़ा। गालिब और मीर की शायरी से भी प्रेरणा ली। इन सबका असर उनके लेखन पर दिखाई दिया। उन्होंने ऐसी भाषा में लिखना शुरू किया, जिसे आम आदमी भी आसानी से समझ सके और अपने जीवन से जोड़ सके।

देश के बंटवारे के समय निदा फाजली के माता-पिता पाकिस्तान चले गए लेकिन उन्होंने भारत में ही रहने का फैसला किया। परिवार से दूर रहकर अपनी जिंदगी बनाना आसान नहीं था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी और लेखन के क्षेत्र में संघर्ष किया।

साल 1964 में वह बंबई चले गए। वहां उन्होंने पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी पहचान बनने लगी और 1969 में उनका उर्दू कविता संग्रह भी प्रकाशित हुआ। उनकी शायरी में बनावट नहीं थी। वे जिंदगी को जैसा देखते और महसूस करते थे, उसे वैसे ही शब्दों में उतार देते थे।

निदा फाजली ने साहित्य के साथ हिंदी फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान बनाई। फिल्म रजिया सुल्तान से उनके फिल्मी गीतों के सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने कई यादगार गीत लिखे। फिल्म आहिस्ता-आहिस्ता का गीत ‘कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता’ और सरफरोश का ‘होश वालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज है’ आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।

उन्होंने अपने अनुभवों और भावनाओं को शायरी में ढाला लेकिन उनकी रचनाएं केवल उनकी अपनी कहानी बनकर नहीं रह गईं। वे लाखों लोगों के दिलों की आवाज बन गईं।

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