राष्ट्रीय
ड्रैगन फ्रूट में सेहत खजाना, बदलेगा किसानों का मुकद्दर
किसानों की आय दोगुना करने के चल रहे प्रयासों के बीच यूपी की योगी सरकार अब ड्रैगन फ्रूट महोत्सव कराने की तैयारी कर रही है। अभी झांसी में स्ट्रॉबेरी महोत्सव कर चुकी है। ड्रैगन फ्रूट में जबरदस्त सेहत खजाना पाया जाता है। जो कि किसानों के मुकद्दर को बदलने में कारगर साबित होगा।
ड्रैगन फ्रूट फल के साथ दवा भी है। एंटीऑक्सीडेंट, बसा रहित, फाइबर से भरपूर ड्रैगन फ्रूट में कैल्शियम, मैग्नेशियम और आयरन के अलावा प्रचुर मात्रा में विटामिन सी एवं ए भी पाया जाता है। अपनी इन्ही खूबियों के नाते इसे सुपर फ्रूट भी कहा जाता है। मर्जी आपकी आप इसे सीधा खाइए या सलाद, जैम, जेली या जूस के रूप में। हर रूप में ये आपकी सेहत को सलामत रखेगा। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा। सुगर के नियंत्रण और रोकथाम में भी इसे प्रभावी पाया गया है। बाकी विटामिन्स और खनिजों के भी अपने लाभ हैं। इन खूबियों के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मुरीद हैं।
नवम्बर में मुख्यमंत्री ने ड्रैगन फ्रूट किसानों से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री की मंशा है कि खेतीबाड़ी से संबधित ऐसे उपयोगी फलों की खूबियों को लोग जानें। इनकी मांग निकले। किसान इनकी खेती करें। उनको अपने उत्पाद का वाजिब दाम मिले, इसके लिए वह उनका स्थानीय स्तर पर महोत्सव भी करवाना चाहते हैं। झांसी में स्ट्रॉबेरी महोत्सव हो चुका है। गोरखपुर में सुनहरी सकरकन्द महोत्सव होना है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ड्रैगन महोत्सव आयोजित करने का भी निर्देश दे चुके हैं। आने वाले दिनों में कुशीनगर में केला, प्रतापगढ़ में आंवला, प्रयागराज में अमरूद महोत्सव का आयोजन भी सरकार कर सकती है। ये सभी उत्पाद संबधित जिलों के एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) हैं।
ड्रैगन फ्रूट, सुनहरी सकरकन्द ओर स्ट्रॉबेरी की चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मन की बात कार्यक्रम में भी कर चुके हैं। ड्रैगन फ्रूट को पिताया फल के नाम से भी जानते हैं, इसे ज्यादातर मेक्सिको और सेंट्रल एशिया में खाया जाता है। इसका टेस्ट काफी हद तक तरबूज जैसा होता है। देखने में यह नागफनी जैसा दिखता है।
ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले सुलतानपुर जिले के लम्भुआ ग्राम कोयरा खुर्द के गया प्रसाद सिंह उर्फ मुरारी सिंह ने कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की थी। प्रधानमंत्री की मन की बात में भी इसकी चर्चा की थी। इसके बाद सुर्खियों में आए ड्रैगन फ्रूट की खेती बाराबंकी, कुशीनगर के भी कुछ प्रगतिशील किसान करने लगे हैं। गया प्रसाद सिंह के मुताबिक ड्रैगन फ्रूट की आर्गेनिक तरीके से प्रदेश में बड़े स्तर पर खेती की जा सकती है। इससे किसानों की आय 8 गुना तक बढ़ सकती है। वह खुद भी ऑर्गेनिक तरीके से इसकी खेती करते हैं। झांसी के हरदीप चावला, गुरुलीन चावला भी जैविक तरीके से ही स्ट्राबेरी की खेती करते हैं। मुख्यमंत्री की मंशा है भविष्य में आयोजित होने वाले महोत्सवों में संबधित उत्पादों के जैविक खेती पर ही जोर दिया जाए।
सब्जी वैज्ञानिक डॉ. एसपी सिंह के मुताबिक इसकी खेती अधिकतम 40 डिग्री और न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर की जा सकती है। किंतु 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है। ड्रैगन की खेती वाली भूमि पर उचित जल निकासी जरूरी है। प्रजाति के आधार पर ड्रैगन फ्रूट लाल-गुलाबी और पीले रंग का हो सकता है। इसकी लताओं का रोपड़ होता है। रोपड़ के समय लाइन से लाइन की दूरी 4 मीटर और पौध से पौध की दूरी तीन मीटर की रखी जाती है। उचित बढ़वार और फलत के लीए रोपड़ के पूर्व गड्ढा तैयार कर 10 किलो सड़ी गोबर की खाद एवं 50 ग्राम एन.पी.के. (नाइट्रोजन, फास्फोरस ओर पोटाश) प्रति गड्ढा में मिलाकर रोपाई करते हैं। ड्रैगन फ्रूट की रोपाई जून-जुलाई एवं सिंचाई का साधन होने पर फरवरी-मार्च में भी कर सकते हैं। इसका पौधा 20 से 25 साल तक फल देता है। इसकी खेती हेतु 7 से 8 फीट ऊंचे सीमेंट के खंभे गाड़ कर तार से मचान बनाया जाता है। रोपाई के दो साल बाद फल आता है।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
-
दुर्घटना1 year agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
महाराष्ट्र2 years agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
महाराष्ट्र2 years agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
राजनीति2 years agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल2 years agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
